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सुप्रीम कोर्ट ने SIR पर उठाए गंभीर सवाल, चुनाव आयोग से मांगा जवाब

15% वोटरों पर फैसला लंबित, 2% जीत के अंतर में निष्पक्षता कैसे तय होगी—कोर्ट की टिप्पणी

पश्चिम बंगाल से जुड़े SIR (Special Intensive Revision) मामले में Supreme Court of India ने कड़ी टिप्पणी करते हुए Election Commission of India से कई अहम सवाल पूछे हैं।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि अगर किसी क्षेत्र में 15% मतदाताओं की स्थिति स्पष्ट नहीं है और उनका सत्यापन अधूरा है, तो ऐसी स्थिति में चुनाव परिणामों की विश्वसनीयता कैसे सुनिश्चित की जाएगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर जीत का अंतर केवल 2% है, तो ऐसे में अधूरी मतदाता सूची चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर सकती है।

यह मामला पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़ा है, जहां आरोप लगाए गए हैं कि बड़ी संख्या में मतदाताओं का डेटा अभी भी सत्यापित नहीं हो पाया है। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया है कि इससे चुनावी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और निष्पक्षता पर असर पड़ सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से स्पष्ट जवाब मांगा है कि वह इस स्थिति से कैसे निपटेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि चुनाव पारदर्शी और निष्पक्ष हों। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि अगर जरूरी हुआ तो इस प्रक्रिया की निगरानी के लिए अतिरिक्त निर्देश जारी किए जा सकते हैं।चुनाव आयोग की ओर से कहा गया है कि वह सभी आवश्यक कदम उठा रहा है और मतदाता सूची को पूरी तरह अपडेट और सत्यापित करने की प्रक्रिया जारी है।

इस मामले की अगली सुनवाई में कोर्ट की ओर से और सख्त रुख अपनाने की संभावना जताई जा रही है। यह मामला आने वाले चुनावों की पारदर्शिता और विश्वसनीयता के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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