रिटायरमेंट निवेश में बढ़ेगी पसंद, कर्मचारियों को मिलेगा ज्यादा लचीलापन

सरकार ने स्वायत्त निकायों के कर्मचारियों के लिए निवेश से जुड़े विकल्पों का दायरा बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। नई व्यवस्था के तहत पात्र कर्मचारियों को अब निवेश के दो अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध कराए जाने की तैयारी है। इसका उद्देश्य कर्मचारियों को अपनी जोखिम क्षमता, उम्र और रिटायरमेंट जरूरतों के अनुसार निवेश रणनीति चुनने की अधिक स्वतंत्रता देना है।
अब तक कई कर्मचारियों के पास सीमित निवेश विकल्प उपलब्ध थे, लेकिन नए विकल्प जुड़ने से वे अपने फंड का आवंटन अधिक लचीले तरीके से कर सकेंगे। इससे ऐसे कर्मचारियों को फायदा हो सकता है जो बेहतर रिटर्न की संभावना तलाशते हैं या अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश रणनीति अपनाना चाहते हैं।

नई व्यवस्था में कर्मचारियों को इक्विटी, सरकारी प्रतिभूतियों और अन्य स्वीकृत निवेश साधनों के बीच अपनी जरूरत के मुताबिक चयन करने का अवसर मिल सकता है। हालांकि वास्तविक लाभ बाजार की स्थिति, चुनी गई योजना और निवेश अवधि पर निर्भर करेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, लंबी अवधि के निवेश में अधिक विकल्प मिलने से रिटायरमेंट कॉर्पस को बेहतर तरीके से व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है। साथ ही कर्मचारी अपनी आयु और जोखिम प्रोफाइल के अनुसार पोर्टफोलियो चुन सकेंगे।

इस फैसले से स्वायत्त निकायों में कार्यरत बड़ी संख्या में कर्मचारियों को दीर्घकालिक वित्तीय योजना बनाने में अधिक सुविधा मिलने की उम्मीद है।