मृतकों का आंकड़ा बढ़ा, नेपाल और तिब्बत में हेलिकॉप्टरों से जारी राहत-बचाव अभियान

काठमांडू। नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र की सीमा पर आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक नेपाल और तिब्बत को मिलाकर करीब 1,500 लोग अब भी लापता हैं। इनमें बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक और तीर्थयात्री शामिल हैं। नेपाल में मृतकों की संख्या लगातार बढ़ रही है और ताजा रिपोर्टों में नेपाल-तिब्बत क्षेत्र में कुल मौतों का आंकड़ा करीब 175 तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है। स्थिति लगातार बदल रही है और राहत एजेंसियां लापता लोगों की तलाश में जुटी हैं।
नेपाल के भोटेकोशी नदी क्षेत्र में अचानक आई बाढ़ ने सड़क, पुल, घरों और अन्य बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है। शुरुआती जांच में हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर या बर्फ-पत्थर के बड़े हिस्से के टूटने से अचानक मलबे और पानी का बहाव बढ़ने की संभावना सामने आई है। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के विश्लेषण के अनुसार शुरुआती तौर पर भूकंप जैसा दिखाई देने वाला संकेत ग्लेशियर और चट्टानों के ढहने से पैदा हुआ था।

नेपाल के रासुवा और आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में पर्यटक संपर्क से बाहर हैं। नेपाल पर्यटन बोर्ड की ताजा जानकारी में 590 पर्यटकों के संपर्क से बाहर होने की बात कही गई है, जिनमें 476 विदेशी और 114 नेपाली पर्यटक शामिल हैं। विदेशी पर्यटकों में भारतीयों की संख्या सबसे ज्यादा बताई गई है। भारत के 177 नागरिक, 63 अमेरिकी, 53 यूक्रेनी, 34 ऑस्ट्रेलियाई और 33 ब्रिटिश नागरिकों के संपर्क में नहीं होने की जानकारी सामने आई है।
चीन के तिब्बत स्थित ग्यिरोंग क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में लोग लापता बताए गए हैं। चीनी सरकारी मीडिया के अनुसार वहां 558 लोगों के लापता होने की सूचना थी, जिनमें 260 विदेशी नागरिक शामिल हैं। इस तरह नेपाल और चीन के आंकड़ों को जोड़ने पर लापता लोगों की संख्या करीब 1,500 तक पहुंचती है।

राहत और बचाव अभियान में नेपाल की सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों की टीमें लगी हैं। हेलिकॉप्टरों के जरिए प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाने और फंसे लोगों को निकालने का काम जारी है। भारत समेत कई देशों ने नेपाल को मानवीय सहायता और बचाव कार्य में सहयोग की पेशकश की है।