
देश में चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। ऐसे में बड़ा सवाल उठ रहा है कि क्या उत्तर प्रदेश की बंद चीनी मिलें भी चीनी की महंगाई की एक बड़ी वजह हैं?
उत्तर प्रदेश में कितनी चीनी मिलें बंद हैं?
उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य है। वर्तमान समय में करीब 121 चीनी मिलें संचालन में हैं, जबकि पिछले कई दशकों में **40 से अधिक चीनी मिलें विभिन्न कारणों—घाटा, तकनीकी पिछड़ापन, निजीकरण और वित्तीय संकट—के चलते बंद हो चुकी हैं। हालांकि इनमें से कुछ मिलों को दोबारा शुरू करने की प्रक्रिया भी चल रही है।

क्या सिर्फ बंद मिलें ही महंगाई की वजह हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार नहीं। बंद मिलों का असर जरूर पड़ता है, लेकिन मौजूदा महंगाई की सबसे बड़ी वजहें हैं—
- चीनी उत्पादन में कमी।
- गन्ने की खेती का क्षेत्र घट जाना।
- मौसम की मार और फसल प्रभावित होना।
- त्योहारी सीजन में मांग बढ़ना।
- सीमित स्टॉक और बाजार में आपूर्ति का दबाव।
- आंकड़े क्या कहते हैं?
उत्तर प्रदेश में गन्ने का रकबा 28.61 लाख हेक्टेयर से घटकर 28.14 लाख हेक्टेयर रह गया, यानी लगभग 47,000 हेक्टेयर की कमी।
देश में चीनी उत्पादन का अनुमान 343 लाख टन से घटकर लगभग 306 लाख टन रह गया। अगस्त 2026 में घरेलू चीनी कीमतों में लगभग 40% तक उछाल दर्ज किया गया, जिसके बाद केंद्र सरकार को 10 लाख टन शुल्क-मुक्त चीनी आयात की अनुमति देनी पड़ी।
बंद मिलों का कितना असर?
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि वर्षों से बंद पड़ी चीनी मिलें आधुनिक तकनीक के साथ दोबारा चालू होतीं, तो स्थानीय स्तर पर गन्ने की खरीद, पेराई क्षमता और चीनी उत्पादन बढ़ सकता था। इससे आपूर्ति पर सकारात्मक असर पड़ता। लेकिन 2026 की मौजूदा महंगाई का मुख्य कारण बंद मिलें नहीं, बल्कि उत्पादन में कमी, कम स्टॉक और बढ़ी हुई मांग है।
सरकार के कदम
कीमतों पर नियंत्रण के लिए केंद्र सरकार ने:8 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दीजमाखोरी रोकने के लिए स्टॉक सीमा लागू की। नई पेराई जल्दी शुरू करने के निर्देश दिए।