दिमाग का “खतरे का अलार्म” बिना वजह भी एक्टिव हो सकता है

आजकल कई लोग बताते हैं कि जब वे अकेले होते हैं तो अचानक घबराहट होने लगती है और ऐसा लगता है जैसे कुछ बुरा होने वाला है। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्थिति काफी हद तक सामान्य हो सकती है, खासकर जब व्यक्ति तनाव, चिंता या ओवरथिंकिंग से गुजर रहा हो।
अकेले होने पर दिमाग अधिक सक्रिय हो जाता है और छोटी-छोटी बातों को भी खतरे की तरह महसूस करने लगता है। इसे “एंग्जायटी रिस्पॉन्स” कहा जाता है, जिसमें शरीर और दिमाग बिना किसी वास्तविक खतरे के भी अलर्ट हो जाते हैं।

इससे बाहर निकलने के लिए कुछ आसान उपाय मददगार हो सकते हैं। जैसे—गहरी सांस लेने की तकनीक अपनाना, ध्यान (मेडिटेशन) करना, खुद को व्यस्त रखना और पॉजिटिव सोच विकसित करना। इसके अलावा, अपनी भावनाओं को किसी करीबी व्यक्ति से साझा करना भी राहत दे सकता है।
यदि यह समस्या लगातार बनी रहती है या बढ़ने लगती है, तो किसी मनोवैज्ञानिक या काउंसलर से सलाह लेना जरूरी है। सही मार्गदर्शन से इस डर पर काबू पाया जा सकता है और जीवन को बेहतर बनाया जा सकता है।