लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने से कैंसर का जोखिम बढ़ने के संकेत

नई दिल्ली। वायु प्रदूषण को लेकर सामने आई एक नई वैश्विक स्टडी ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। Nature Health में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, लंबे समय तक वायु प्रदूषण के संपर्क में रहने और कैंसर के बढ़ते जोखिम के बीच महत्वपूर्ण संबंध पाया गया है। शोधकर्ताओं ने वर्ष 2000 से 2020 के बीच 952 स्थानों पर 10.9 करोड़ कैंसर मामलों का विश्लेषण किया। अध्ययन में PM2.5, ओजोन और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड जैसे प्रमुख प्रदूषकों के लंबे समय तक संपर्क के प्रभावों का आकलन किया गया।
रिपोर्ट के अनुसार, PM2.5 सबसे प्रमुख प्रदूषक के रूप में सामने आया। शोधकर्ताओं ने अनुमान लगाया कि अध्ययन अवधि के दौरान PM2.5 के संपर्क से करीब 88.2 लाख कैंसर के मामले जुड़े हो सकते हैं। अध्ययन में यह भी पाया गया कि PM2.5 के स्तर में हर 10 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर की वृद्धि सभी प्रकार के कैंसर के जोखिम में लगभग 16 प्रतिशत वृद्धि से जुड़ी थी। हालांकि, ये आंकड़े जनसंख्या स्तर पर जोखिम के संबंध को दर्शाते हैं और किसी व्यक्ति के लिए यह तय नहीं करते कि प्रदूषण से उसे कैंसर होगा ही।
एक अन्य वैश्विक समीक्षा में भी लंबे समय तक PM2.5 के संपर्क को कैंसर के जोखिम से जोड़ा गया है। UICC की 2026 रिपोर्ट के अनुसार, प्रदूषित हवा में लंबे समय तक रहने से किसी व्यक्ति में कैंसर विकसित होने का कुल जोखिम करीब 11 प्रतिशत और कैंसर से मृत्यु का जोखिम लगभग 12 प्रतिशत अधिक पाया गया।

वायु प्रदूषण का असर केवल फेफड़ों तक सीमित रहने की चिंता नहीं है। नई रिसर्च में श्वसन तंत्र के अलावा पाचन, प्रजनन और अन्य अंगों से जुड़े कैंसर के साथ भी प्रदूषण के संभावित संबंधों की जांच की गई है। वैज्ञानिकों के मुताबिक PM2.5 जैसे बेहद छोटे कण शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस, DNA क्षति और प्रतिरक्षा प्रणाली में बदलाव जैसी प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण से बचाव के लिए AQI की निगरानी, अत्यधिक प्रदूषण वाले समय में अनावश्यक बाहरी गतिविधि कम करना और स्वच्छ हवा के लिए व्यक्तिगत व सार्वजनिक स्तर पर कदम उठाना जरूरी है। लगातार खांसी, सांस फूलना या अन्य परेशानियां बनी रहें तो चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।