अप्रैल में थोक महंगाई दर 8.3% पहुंची, ईंधन महंगा होने से बढ़ी आर्थिक चिंता

पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है। क्षेत्र में संघर्ष और आपूर्ति को लेकर बढ़ी अनिश्चितता के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है। इसका सीधा असर भारत जैसे तेल आयातक देशों पर पड़ रहा है, जहां ईंधन लागत बढ़ने से महंगाई पर दबाव बढ़ गया है।
ताजा आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल महीने में थोक महंगाई दर 8.3 प्रतिशत तक पहुंच गई, जिसने नीति निर्माताओं और आम उपभोक्ताओं दोनों की चिंता बढ़ा दी है। पेट्रोल, डीजल, परिवहन और उत्पादन लागत में बढ़ोतरी का असर खाद्य पदार्थों से लेकर रोजमर्रा के सामान तक देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतों में यह तेजी जारी रहती है तो आने वाले महीनों में खुदरा महंगाई पर भी असर पड़ सकता है।

सरकार और आर्थिक एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। यदि पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं हुआ तो उद्योग, व्यापार और घरेलू बजट पर अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में वैश्विक घटनाक्रम अब सीधे आम आदमी की जेब पर असर डालते नजर आ रहे हैं।