एफआईआई की वापसी पर अनिश्चितता, रुपये की कमजोरी और वैश्विक हालात भारतीय शेयर बाजार के लिए चुनौती

भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाले साल चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी निवेशक (FII) 2027 तक भारतीय बाजार से दूरी बनाए रख सकते हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह कमजोर होता रुपया, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और बेहतर रिटर्न की तलाश में निवेशकों का अन्य बाजारों की ओर रुख करना माना जा रहा है।
कमजोर रुपये का सीधा असर विदेशी निवेशकों के रिटर्न पर पड़ता है। जब रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होता है, तो विदेशी निवेशकों को भारतीय बाजार में कमाई के बावजूद मुद्रा विनिमय में नुकसान उठाना पड़ सकता है। यही कारण है कि एफआईआई निवेश को लेकर सतर्क रुख अपना रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी ब्याज दरें, वैश्विक महंगाई और भू-राजनीतिक तनाव भी निवेश के फैसलों को प्रभावित कर रहे हैं। भारतीय बाजार की मजबूत घरेलू खपत और विकास दर सकारात्मक संकेत देती है, लेकिन विदेशी पूंजी की कमी से बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
हालांकि घरेलू निवेशकों (DII) की मजबूत भागीदारी भारतीय बाजार को सहारा दे रही है। अगर रुपये में स्थिरता आती है और वैश्विक हालात सुधरते हैं, तो विदेशी निवेशकों की वापसी संभव है। फिलहाल निवेशकों को बाजार में सतर्क रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।