डीप-सी डाइविंग, पनडुब्बी बचाव और अंडरवॉटर ऑपरेशन में मिलेगी बड़ी रणनीतिक बढ़त

नई दिल्ली। भारतीय नौसेना की समुद्री और अंडरवॉटर क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में INS निपुण एक महत्वपूर्ण कदम है। यह निस्तार-क्लास का दूसरा डाइविंग सपोर्ट वेसल (DSV) है, जिसे हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड ने भारत में तैयार किया है। नौसेना इसे 31 अगस्त 2026 को मुंबई के नेवल डॉकयार्ड में कमीशन करने जा रही है।
INS निपुण की खासियत केवल इसका आकार या आधुनिक उपकरण नहीं, बल्कि इसका स्वदेशी निर्माण है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस श्रेणी के पोत में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री और तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इसका निर्माण भारत की बढ़ती जहाज निर्माण क्षमता और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को दर्शाता है।

लेकिन सवाल है कि यह पोत हिंद महासागर में भारत के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों है? इसका मुख्य काम पारंपरिक युद्धपोत की तरह दुश्मन पर हमला करना नहीं, बल्कि समुद्र के भीतर जटिल अभियानों को सहायता देना है। INS निपुण डीप-सी डाइविंग, अंडरवॉटर सर्वे, समुद्र के भीतर क्षतिग्रस्त उपकरणों की सहायता और पनडुब्बी बचाव अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
यह पोत भारत के डीप सबमर्जेंस रेस्क्यू व्हीकल (DSRV) के लिए मदरशिप की भूमिका भी निभा सकता है। किसी पनडुब्बी के समुद्र की गहराई में संकट में फंसने की स्थिति में ऐसी क्षमता बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। इससे भारत को अपने पनडुब्बी बेड़े के साथ-साथ क्षेत्रीय साझेदार देशों की पनडुब्बियों के लिए भी बचाव सहायता उपलब्ध कराने की क्षमता मिलती है।
INS निपुण के नौसेना में शामिल होने से पूर्वी और पश्चिमी दोनों समुद्री मोर्चों पर अंडरवॉटर सपोर्ट क्षमता मजबूत होगी। INS निस्तार के साथ मिलकर ये दोनों पोत भारत की समुद्री निगरानी, बचाव और पानी के भीतर होने वाले अभियानों को अधिक प्रभावी बनाएंगे।
हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति को देखते हुए ऐसी क्षमता का महत्व और बढ़ जाता है। इसका असर केवल सैन्य ताकत तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि समुद्री सुरक्षा, पनडुब्बी बचाव और मानवीय सहायता अभियानों में भी दिखाई देगा।