
नई दिल्ली |
देशभर में प्याज की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। त्योहारी सीजन से पहले प्याज के दामों में तेज़ उछाल देखने को मिल रहा है, जिसके बाद केंद्र सरकार ने कीमतों पर नियंत्रण के लिए ‘कांदा एक्सप्रेस’ शुरू करने का फैसला लिया है।
प्रमुख आंकड़े
– पूरे भारत में प्याज का औसत खुदरा मूल्य 43.53 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 59% अधिक है।
– औसत थोक मूल्य 35.58 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया, जो एक साल पहले की तुलना में 68% अधिक है।
– प्रमुख शहरों में खुदरा कीमतें:
– दिल्ली: 55 प्रति किलो
– चेन्नई: 60 प्रति किलो
– कोलकाता: 53 प्रति किलो

प्याज महंगा क्यों हुआ?
विशेषज्ञों के अनुसार कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे कई कारण हैं—
– खरीफ फसल की सीमित आवक
– बारिश और मौसम संबंधी बाधाओं से आपूर्ति प्रभावित
– त्योहारी सीजन से पहले मांग में बढ़ोतरी
– कुछ मंडियों में जमाखोरी और सट्टेबाजी की आशंका
सरकार का एक्शन
कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने कई कदम उठाए हैं।
– नासिक से बड़े शहरों तक प्याज पहुंचाने के लिए ‘कांदा एक्सप्रेस’ ट्रेनें चलाई जा रही हैं।
– सरकार के पास 1.21 लाख टन प्याज का बफर स्टॉक उपलब्ध है।
– बफर स्टॉक का प्याज 35 प्रति किलो की रियायती दर पर NCCF और NAFED के माध्यम से बेचा जा रहा है।
– पहले चरण में दिल्ली, चेन्नई, मदुरै, एर्नाकुलम और गुवाहाटी को प्राथमिकता दी गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नई फसल की आवक अगले कुछ सप्ताह में सामान्य रहती है और सरकारी हस्तक्षेप जारी रहता है, तो प्याज की कीमतों में धीरे-धीरे राहत मिल सकती है। हालांकि, यदि मौसम और आपूर्ति की स्थिति बिगड़ती है, तो कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।