सिर्फ गैंग चार्ट में नाम होने से मुकदमा नहीं, कोर्ट ने मनमाने इस्तेमाल पर लगाई रोक

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के गैंगस्टर्स एक्ट के इस्तेमाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए दो अधिवक्ताओं के खिलाफ दर्ज गैंगस्टर्स एक्ट के मुकदमों को निरस्त कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल पुलिस के गैंग चार्ट में किसी व्यक्ति का नाम शामिल कर देने से उसके खिलाफ गैंगस्टर्स एक्ट के तहत कार्रवाई नहीं की जा सकती। इसके लिए किसी मूल आपराधिक अपराध का कानूनी आधार होना जरूरी है।
यह मामला फतेहगढ़-फर्रुखाबाद बार एसोसिएशन के चुनाव विवाद से जुड़ा था। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए अधिवक्ता शिव प्रताप सिंह और हिमांशु श्रीवास्तव के खिलाफ दर्ज गैंगस्टर्स एक्ट की कार्रवाई को रद्द कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने कानून की व्याख्या करते हुए कहा कि गैंगस्टर्स एक्ट किसी व्यक्ति को केवल ‘गैंग’ या ‘गैंगस्टर’ घोषित करने के लिए स्वतंत्र आपराधिक अपराध नहीं बनाता। अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 20(1) के सिद्धांत का भी उल्लेख किया, जिसके तहत किसी व्यक्ति को ऐसे कृत्य के लिए दंडित नहीं किया जा सकता जिसे कानून ने अपराध के रूप में स्थापित न किया हो।

फैसले में यह भी स्पष्ट किया गया कि पुलिस द्वारा तैयार किया गया गैंग चार्ट अपने आप में किसी व्यक्ति के खिलाफ गैंगस्टर्स एक्ट की कार्रवाई का पर्याप्त आधार नहीं हो सकता। अदालत ने कानून के कथित मनमाने इस्तेमाल पर गंभीर टिप्पणी की।
इस फैसले को उत्तर प्रदेश में गैंगस्टर्स एक्ट के इस्तेमाल के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, अन्य आपराधिक मामलों में चल रही कार्रवाई इस फैसले से स्वतः समाप्त नहीं होगी और वे संबंधित कानूनों के अनुसार जारी रह सकती हैं।