एक साथ दो विश्वविद्यालय से बी ए करना शिक्षक को पड़ा महंगा, नौकरी गयी, जमानत याचिका भी खारिज।

बाराबंकी। एक साथ दो विश्व विद्यालय से बी ए की डिग्री हासिल कर शिक्षक की नौकरी प्राप्त करने,तथ्य छिपाने सम्बंधी आरोपी अध्यापक की जमानत याचिका की सुनवाई के बाद अपर जिला जज/विशेष न्यायाधीश एससीएसटी एक्ट अशोक कुमार यादव ने जमानतयाचिका खारिज कर दी।


इस मामले में आरोपी टीचर को नौकरी से तो बर्खास्त होना ही पड़ा,साथ ही न्यायालयने गम्भीर अपराध मानतेहुए जमानत याचिका खारिज कर दी।अब आरोपी टीचर को जेल की सलाखों में समय बिताना होगा।
विशेष लोक अभियोजक सुनीत अवस्थी व अरविंद राजपूत ने व्योरा देते हुए बताया कि थाना रामनगर के ग्राम सैदनपुर सेमराय निवासी कृष्ण कुमार सिंह ने वर्ष 2018 में बाराबंकी में 12460 टीचर की बैकेंसी आवेदन कर अध्यापक की नौकरी प्राप्तकर ली थी तथा 3मई 2018 को तहसील फतेहपुर के प्राइमरीस्कूल धधौरा में सहायक अध्यापक पद पर ज्वॉइन किया था।

उस भर्ती प्रक्रिया की जांच कराने की मांग बीटीसी प्रशिछु शिक्षकसंघ ने अपर जिलाधिकारी से की थी।अपर जिलाधिकारी ने बेशिक शिक्षा अधिकारी को जांच हेतु आदेशित किया था। अपर जिलाधिकारी न यह भी आदेशदियाथा कि अभिलेख फर्जी पाये जाने पर एफआईआर भी दर्ज करावें। जांच हेतु गठित जनपदीय कमेटी में जांच में पाया कि आरोपी टीचर कृष्ण कुमार सिंह ने वर्ष 2009 में डॉ राम मनोहरलोहिया विश्व विद्यालय फैजाबाद से तथा उसी वर्ष लखनऊ विश्वविद्यालय से भी एक साथ बीए की परीक्षा उत्तीर्ण की। जांच कमेटी की आख्या पर टीचर को जून 2018 को नौकरी से हटा दिया गया था लेकिन एफआईआर का प्रकरण लम्बित था।

अंततः खण्ड शिक्षा अधिकारी फतेहपुर गौतम प्रकाश ने थाना फतेहपुर में अपराध अंक 74/20 पर भादस की धारा 420,467,468,471 के तहत एफआईआरदर्ज कराई थी।
विशेष न्यायाधीश अशोक कुमार यादव के समक्ष बचाव पक्ष द्वारा तर्क दिया गया कि आरोपी 20 सितंबर2021 से जिला कारागार में बंदी है,उसने कोई कूट रचना नही किया,सरकारी धन भी आहरण नही कियाहै लेकिन न्यायालय ने कहा कि एक साथ दो विश्व विद्यालय से स्नातक की डिग्रीहासिल करना गम्भीर अपराध है।न्यायालय ने बचाव पक्ष के तर्कों को अस्वीकारकरते हुए आरोपी की जमानतयाचिका खारिज कर दी।

रिपोर्ट- सरदार परमजीत सिंह

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