कुलाधिपति सीएम योगी क्यों अनजान, सैफई मेडिकल विवि में चल रहे भ्रष्टाचार और जातिवाद के खेल?

इटावा जनपद के सैफई कस्बे में उत्तर प्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा मेडिकल विश्वविद्यालय है और स्वयं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस मेडिकल विश्वविद्यालय के कुलाधिपति हैं समाजवादी पार्टी के संरक्षक और तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने अपने क्षेत्र के लोगों और बीहड़ के कई जनपदों के गरीबों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सैफई में मेडिकल कॉलेज की स्थापना की थी जिसे बाद में अखिलेश यादव के शासन में मेडिकल विश्वविद्यालय का दर्जा दिया गया।

यहां प्रतिदिन हजारों की संख्या में मरीज आते हैं और अरबों रुपए का बजट भी उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा इस मेडिकल विश्वविद्यालय के संचालन के लिए उपलब्ध कराया जाता है । राजधानी लखनऊ से काफी दूर सैफई ग्राम पंचायत में स्थित इस मेडिकल विश्वविद्यालय में भ्रष्टाचार मनमानी और अराजकता की खबरें अक्सर सामने आती रहती है लेकिन लखनऊ में बैठी सरकार और इस विश्वविद्यालय के कुलाधिपति के रूप में कार्यरत मुख्यमंत्री तक खबरें भ्रष्ट अधिकारियों का नेटवर्क जल्दी पहुंचने ही नहीं देता।

जो सूचनाएं मुख्यमंत्री को मिलती हैं उसके बारे में भी उन्हें गुमराह कर दिया जाता है क्योंकि संस्थान में आने वाला बजट अक्सर भ्रष्टाचारियों को इतना मजबूत कर देता है कि उनकी पहुंच ऊपर तक हो जाती है ।
आरोपों के मुताबिक सैफई मेडिकल विश्वविद्यालय में पिछले कुछ महीनों में दवा और उपकरण खरीद में जमकर घोटाला हुआ है कोरोनावायरस की रोकथाम के लिए भी बड़े पैमाने पर आवश्यकता से अधिक वस्तुओं की नियम विरुद्ध खरीद की गई है कमीशन खोरी और भ्रष्टाचार के लिए सरकार खजाने को नुकसान पहुंचाया गया है। इतना ही नहीं यहां के भ्रष्ट डॉक्टरों ने काली कमाई के लालच में बहुत से गरीब मरीजों के शरीर में उनके हृदय में घटिया पेसमेकर प्रत्यारोपित कर दिया जिसको लेकर शासन तक शिकायतें और लिखा पढ़ी हुई लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई उल्टा जिन लोगों ने जांच करके भ्रष्टाचार को उजागर किया उन्हें ही ठिकाने लगा दिया गया उनके ही विरुद्ध कार्यवाही की जा रही हैं।

संस्थान के अधिकारी कर्मचारी सभी जानते हैं कि कि संस्थान में पिछले कई महीनों से चल रहे भ्रष्टाचार के कई मामलों को जिन ईमानदार अधिकारियों ने उजागर किया उन्हें ही परेशान किया जा रहा है उनका उत्पीड़न किया जा रहा है और जातीय मानसिकता के तहत उन्हें चिकित्सा अधीक्षक के पद से हटाने की साजिश की गई है ।

उन्होंने कुलाधिपति मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर कहा है कि संस्थान में नियम विरुद्ध तरीके से प्रति कुलपति प्रोफेसर रमाकांत यादव कुलपति की कुर्सी पर काबिज हैं और मनमाने आदेश जारी कर रहे हैं जिससे भ्रष्टाचार और तानाशाही को बढ़ावा मिल रहा है। उन्हें पेशेंट किचन घोटाले के मामले में फर्जी तरीके से फंसाया गया है क्योंकि उन्होंने पूर्व में कई घोटालों की जांच की है और भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पत्र लिखे हैं इसीलिए भ्रष्ट अधिकारियों का नेटवर्क एकजुट होकर उन्हें परेशान कर रहा है। इस विषय पर प्रमुख सचिव आलोक कुमार का कहना है कि जल्द ही वहां कुलपति की तैनाती हो जाएगी कुलपति का चयन हो गया है जल्द ही वह ज्वाइन कर लेंगे और उसके बाद वह स्वयं सभी विषयों को देखेंगे।

द इंडियन ओपिनियन
लखनऊ

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