जानें क्या हैं हाईपोटेंशन या लो ब्लड प्रेशर? हमारी विशेषज्ञ डॉ मेजर प्राची गर्ग से

हाईपोटेंशन या लो ब्लड प्रेशर कोई बीमारी नहीं है बल्कि यह एक अवस्था है जिसमें रक्तचाप सामान्य से कम हो जाता है। इस अवस्था को सबसे पहले 1893 में समझा गया था। 1927 में नॉरिस ने बताया कि लो बीपी वाले व्यक्ति को कमजोरी, जल्दी थकान होना, हाथ पैरों का ठंडा होना, बहुत देर तक शारीरिक अथवा मानसिक श्रम न कर पाना जैसी शिकायतें हो सकती हैं।

क्या है हाइपोटेंशन ?

हाइपोटेंशन उस अवस्था को कहते हैं जब आपका ब्लड प्रेशर 90/60 mmHg से कम हो जाता है। इस अवस्था में सिस्टोलिक बीपी (ऊपर वाला बीपी) 90 से कम और सिस्टोलिक और मीन आर्टिरियल प्रेशर ( MAP) 65 mmHg से कम हो जाता है। यदि सिस्टोलिक बीपी सामान्य से 40 mmHg कम हो जाए तब भी यह हाइपोटेंशन होता है। एक अन्य प्रकार का ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन होता है जिसमें पोजीशन बदलने के बाद (लेटे से खड़े होने की अवस्था में) ऊपर का बीपी 20 से ज्यादा और नीचे वाला बीपी 10 mmHg से अधिक कम हो जाता है।

क्या यह हानिकारक है ?

सामान्यतः यह हानिकारक नहीं होता क्योंकि लो ब्लड प्रेशर वाले ज्यादातर लोगों में कोई लक्षण नहीं होते। रक्तचाप कम होने पर ऑक्सीजन युक्त खून न मिलने के कारण शरीर के अंगों को जब नुकसान पहुंचता है, तब यह चिंता का विषय बन जाता है।
कोई भी ऐसी बीमारी जिसमें हार्ट ठीक से खून को पंप नहीं कर पाता या दिल की धड़कन का कम होना या जो शरीर की हमारी खून की नलियों में किसी भी तरह का अवरोध ब्लड प्रेशर को प्रभावित करता है।

लो ब्लड प्रेशर होने के कारण

साधारणत: हड्डी टूटना, अधिक रक्त स्राव, कम पानी का पीना या दस्त और अत्यधिक उल्टियाँ होने पर शरीर से बहुत ज्यादा पानी का निकल जाना, सेप्टिक शॉक – शरीर में इन्फेक्शन होना, किसी दवाई या किसी अन्य कारण से एलर्जिक रिएक्शन का होना, दिल की पंपिंग का कम होना, खून की नलियों में किसी भी तरह का अवरोध लो ब्लड प्रेशर के कारण होते हैं।

लो ब्लड प्रेशर के लक्षण

चक्कर या मूर्छा आना, दिल की धड़कन तेज होना, सांस लेने में परेशानी होना, पैरों हाथों का ठंडा रहना, भूलने जैसी बीमारी, उबकाई आना (उल्टी आने जैसा लगना), कमजोरी या थकान रहना।

कभी-कभी लो ब्लड प्रेशर को एंग्जाइटी, डिप्रेशन या फाइब्रोमायलजिया मान लिया जाता है

इस अवस्था का इलाज

यदि लो ब्लड प्रेशर से कोई परेशानी नहीं हो रही है या बहुत हल्के लक्षण हैं और ब्लड प्रेशर कम होने का कारण नही है तो सामान्यतः इलाज की आवश्यकता नहीं पड़ती। लेकिन यदि लक्षण किसी बीमारी की वजह से आ रहे हैं तो उस बीमारी का इलाज किया जाता है।

लो ब्लड प्रेशर हो तो संतुलित आहार लें। निश्चित अंतराल में खाना खाए। यदि आपको डॉक्टर ने मना नहीं किया तो खूब सारा पानी, नींबू शिकंजी, नारियल पानी या अन्य तरल पदार्थों का सेवन करें। पैरों में स्टॉकिंग पहन सकते है।

क्या न करें?

मदिरा या अल्कोहल का सेवन और लंबे समय तक खड़े रहकर काम न करें। अचानक या झटके से बैठे या खड़े मत हों।

जीवन शैली और खान पान में आवश्यक सुधार लाकर और तनाव मुक्त जीवन व्यतीत करके आप इस अवस्था में जाने से अपने आप को बचा सकते है । लक्षण दिखने और आवश्यकता पडने पर अपने चिकित्सक की सलाह से लो ब्लड प्रेशर का इलाज करवाएं ।

हेल्थ डेस्क – द इंडियन ओपिनियन

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