थम गया है चुनावी महासमर। बस एक दिन बाद पता चल जाएगा कौन होगा प्रदेश का अगला मुख्यमंत्री

दो महीने से अधिक चली चुनावी प्रक्रिया अब निर्णायक दौर में पहुँच चुकी है । कल वोटों की गिनती और परिणामों की घोषणा के साथ इस सम्बंध में सारे कयास शान्त हो जायेगें की प्रदेश में अगली सरकार कौन सी पार्टी बनाएगी । कल विजेताओं के घर में समय पूर्व ही होली मनेगी और हारने वालों के घरों में सन्नाटा पसर जाएगा।

इस चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सभी अधिकारी, कर्मचारी , पुलिस / अर्धसैनिक बल और शिक्षकगण बधाई के पात्र हैं जिन्होंने अपने अथक प्रयासों से बिना किसी बड़ी घटना के इसको सफलता पूर्वक सम्पन्न कराया।

बस अब कल का दिन बाकी है जब पुलिस व सभी ज़िलों के प्रशासन को कंधे से कंधे मिलाकर वोटों की गिनती का कार्य निष्पक्ष और पारदर्शक ढंग से सम्पन्न कराना है। हमें नही भूलना चाहिए कि जीते हुए प्रत्याशी व समर्थकों का उन्माद एवम हारे हुए प्रत्याशी व समर्थकों की हार की खीज और गुस्सा कभी भी शान्ति भंग करने का सबब बन सकता है ।

यह सर्व विदित है कि इस बार प्रदेश में सत्ता का संघर्ष द्विपक्षी है फिर भी कुछ उम्मीदवारों के चुनाव परिणामों का उत्सुकता से इंतज़ार रहेगा-

  1. मुख्यमंत्री पद के दावेदार माननीय योगी आदित्यनाथ जी व अखिलेश यादव जी की सीटों के परिणाम ।
  2. गौरवशाली पी कैप को उतार कर गांधी टोपी ग्रहण करने वाले श्री राजेश्वर सिंह और श्री असीम अरुण की सीटों के परिणाम ।
  3. आया राम गया राम की राजनीति के सिरमौर बने श्री स्वामी प्रसाद मौर्य,श्री ओ पी राजभर और श्री दारा सिंह चौहान की सीटों के परिणाम ।

टीवी चैनलों ने एग्जिट पोल के माध्यम से अपनी अपनी पसन्द की सरकारों के सत्ता पर काबिज होने की संभावनाएं जता दी हैं , पर यदि 30- 40 हज़ार मतदाताओं से बात कर करोङो मतदाताओं के मन की बात जानी जा सकती तो आज बंगाल में ममता बैनर्जी की जगह भारतीय जनता पार्टी का कोई मुख्यमंत्री होता । वैसे कल जब तक परिणाम नहीं आ जाते तब तक ‘दिल बहलाने को ग़ालिब ख्याल अच्छा है।’

कल जो भी परिणाम आयें सभी राजनैतिक दलों को उन्हें पूरी सौम्यता और गरिमा के साथ स्वीकार करते हुए प्रदेश में कहीं भी शांती भंग नहीं होने देनी चाहिए । संवैधानिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा कर हम जाने अनजाने लोकतंत्र को ही कमज़ोर बनाते हैं ।

पाँच साल बाद आपको फिर एक बार अवसर मिलेगा।इस बीच की अवधि में जनता के बीच जाइये और उनकी समस्याओं और मुद्दों से राजनैतिक लाभ उठाने की बजाय पूरी ईमानदारी से सुलझाने का प्रयास कीजिये । याद रखिये आप जितना एक सामान्य मतदाता के करीब जाएंगे,उससे जुड़ेंगे उतनी ही सशक्त और लोकप्रिय आपकी पार्टी होगी ।

याद रखिये आपकी पार्टी कल भले ही यह चुनाव जीत अथवा हार जाए लोकतंत्र और सामाजिक मर्यादाओं को कभी भी किसी भी परिस्थिति में हारने नहीं देना है।

आलेख- विकास चन्द्र अग्रवाल

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