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अतीक और अशरफ की तरह ही MLA राजू पाल,संदीप यादव देवीलाल को पुलिस की मौजूदगी में ही गोलियों से भून दिया गया था।

द इंडियन ओपिनियन
प्रयागराज

25 जनवरी 2005 दोपहर लगभग 3:00 बजे का वक्त बीएसपी विधायक राजू पाल गाड़ी खुद अपनी क्वालिस गाड़ी के ड्राइविंग सीट पर मौजूद थे पीछे की गाड़ी में उनके सुरक्षाकर्मी और अन्य लोग मौजूद थे अचानक तेज रफ्तार से एक महान आता है और उसमें मौजूद चार लोग बेहद नजदीक से राजू पाल पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर देते हैं ऑटोमैटिक हथियारों से गोलियां काफी देर तक चलती रहती है MLA के शरीर में डेढ़ दर्जन गोलियां आर पार हो जाती है कुछ ही देर में राजू उनके सहयोगी संदीप यादव और देवीलाल की मौत हो जाती है।

दूसरी गाड़ी में मौजूद लोग राजू पाल को अस्पताल ले जाने की कोशिश करते हैं इस दौरान 5 किलोमीटर तक उनकी गाड़ी के पीछे हमलावरों की गाड़ी दौड़ती रहती है और फायरिंग होती रहती है बदमाश या नहीं चाहते थे कि किसी भी हालत में राजू पाल को इलाज मिल जाए और उनकी जान बच जाए इसलिए लगातार फायरिंग करते रहे, जब बदमाश निश्चिंत हो जाते हैं कि राजू पाल पूरी तरह मौत के मुंह में समा चुका है तब वह वापस चले जाते हैं ।

फिल्मी अंदाज में हुआ हत्याकांड लोगों के जेहन में उस समय फिर ताजा हो गया जब 2 दिन पहले प्रयागराज में अतीक अहमद और उसके भाई की पुलिस सुरक्षा में हत्या हुई । विधायक राजू पाल जी पुलिस कर्मियों की सुरक्षा घेरे में थे उन्हें एसएलआर यानी सेल्फ लोडेड राइफल से तैनात 4 पुलिस के सुरक्षाकर्मी मिले थे उनकी निजी सुरक्षाकर्मी भी राजू पाल के साथ चलते थे इसके बावजूद अतीक अहमद के शूटरों ने बेहद नजदीक से विधायक राजू पाल उनके साथी संदीप यादव और देवीलाल को गोलियों से छलनी कर डाला था और आराम से फरार हो गए थे।

उस समय भी पुलिस मौके पर होने के बावजूद विधायक समेत 3 लोगों को सरेआम गोलियों से भूनने वाले बदमाशों पर कोई गोली नहीं चला पाई थी। उस समय भी तत्कालीन सरकार पर गंभीर आरोप लगे थे तब वह मुख्यमंत्री थे मुलायम सिंह यादव और सरकार थी समाजवादी पार्टी की।

राजू पाल की हत्या के बाद पूरे इलाहाबाद शहर में तनाव फैल गया था कई इलाकों में हिंसा भी हुई थी आगजनी भी हुई थी इलाहाबाद की कानून व्यवस्था 2 दिनों तक प्रभावित थी। आरोप लगा था कि पुलिस अधिकारियों ने जबरन राजू पाल का शव कब्जे में लेकर अंतिम संस्कार करवा दिया था।

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