प्रदेश में पहली बार महापौर के अधिकार सीमित, शहर के सर्वोच्च प्रोटोकॉल पद पर उठे बड़े सवाल

हाईकोर्ट के हालिया आदेश के बाद लखनऊ की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। शहर के सबसे शीर्ष प्रोटोकॉल पद पर बैठी महापौर को लेकर अब इस्तीफे की अटकलें शुरू हो गई हैं। अदालत के फैसले के बाद महापौर के कुछ अधिकार सीमित होने की चर्चा है, जिसे प्रदेश की नगरीय राजनीति में एक बड़े घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है।
लखनऊ में महापौर का पद केवल प्रशासनिक ही नहीं, बल्कि प्रोटोकॉल के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। शहर के प्रमुख सरकारी और सार्वजनिक आयोजनों में महापौर की विशेष भूमिका रहती है। ऐसे में अधिकारों में कटौती के बाद राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठ रहा है कि क्या नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए महापौर इस्तीफा देंगी।

हालांकि, अभी तक महापौर या नगर निगम प्रशासन की ओर से इस्तीफे को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मामला कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया से जुड़ा है, इसलिए आगे की रणनीति अदालत के विस्तृत आदेश और शासन के निर्देशों पर निर्भर करेगी।
यह मामला प्रदेश में पहली बार सामने आया है, जब किसी महापौर के अधिकारों को लेकर इतना बड़ा संवैधानिक और प्रशासनिक विवाद खड़ा हुआ है।