पसमांदा नेता वसीम राइन के निशाने पर कौन ? सुरेश यादव या समाजवादी पार्टी! सोशल मीडिया पर बगावत का बिगुल!

बाराबंकी में समाजवादी पार्टी के ही पुराने नेता माने जाने वाले वसीम राइन किसी बात से नाराज होकर समाजवादी पार्टी के खिलाफ पसमांदा मुसलमानों यानी पिछड़े मुसलमानों को एकजुट करने की मुहिम चला रहे हैं सोशल मीडिया पर मौजूद वसीम के कई पोस्ट इस बात की गवाही दे रहे हैं कि वह समाजवादी पार्टी से नाराज हैं और मुसलमानों में पचासी फीसदी की संख्या रखने वाले पसमांदा मुसलमानों को सपा के खिलाफ एकजुट कर रहे हैं।

जानकारों के मुताबिक विधानसभा चुनाव के पहले सोशल मीडिया पर वसीम राइन का यह अभियान समाजवादी पार्टी को नुकसान पहुंचा सकता है। फेसबुक पर वसीम के कई चर्चित पोस्ट वायरल हो रहे हैं।
“पहले सवर्ण मुस्लिम पसमांदा मुस्लिम को चारपाई पर नहीं बैठने देते थे आज यादव जाटव अपने स्टेज पर नहीं बैठने देते”- वसीम राइन

बाराबंकी में समाजवादी पार्टी को पिछड़े मुसलमानों की गोलबंदी से बड़ा नुकसान हो सकता है यहां पसमांदा मुस्लिम समाज के नेता वसीम राइन समाजवादी पार्टी के ऊपर पसमांदा मुसलमानों को धोखा देने का आरोप लगाते हुए बड़ा अभियान सोशल मीडिया के जरिए चला रहे हैं वसीम सोशल मीडिया पर लगातार पसमांदा मुसलमानों को हिस्सेदारी न मिलने को लेकर एक मुहिम चला रहे हैं ।

3 दिन पहले उन्होंने फेसबुक पर लिखा कि “पसमांदा मुसलमानों के साथ सपा ने धोखा किया हिस्सेदारी नहीं दी”
कुछ दिनों पहले उन्होंने लिखा था कि “ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड में एक भी पसमांदा मुसलमान नहीं है और बोर्ड के नेता मदनी साहब ने पसमांदा मुसलमानों के वोटों की डील सपा मुखिया से कर ली है”

कुछ दिनों पहले वसीम ने फेसबुक पर ही लिखा था कि ‘जनपद बाराबंकी में आजादी के बाद से आज तक सिर्फ एक मुस्लिम पसमांदा मुस्लिम विधायक हुआ जबकि मुस्लिम समाज में 85 फ़ीसदी हिस्सेदारी होने के बावजूद सत्ता में हिस्सेदारी शून्य है”

कुल मिलाकर सोशल मीडिया पर वसीम काफी दिनों से एक अभियान चला रहे हैं जिसका सबसे ज्यादा नुकसान समाजवादी पार्टी को हो रहा है पसमांदा मुसलमानों यानी पिछड़े मुसलमानों की 85% की संख्या बताते हुए वह सामान्य मुसलमानों यानी अशर।फ मुसलमानों पर पिछड़े मुसलमानों के शोषण का आरोप लगाते हैं ।

वैसे समाजवादी पार्टी से ही वसीम लाइन लंबे समय से जुड़े हुए हैं लेकिन विधानसभा चुनाव के पहले उनका यह अभियान खास तौर पर सदर विधानसभा का मुद्दा उठाते हुए वसीम लाइन लिखते हैं “जुम्मन मियां ने बाराबंकी विधानसभा से 5 बार सपा उम्मीदवार को एमएलए बनाया है एक बार यादव समाज जुम्मन मियां को भी एमएलए बनाए”

कुल मिलाकर वसीम की बातें पिछड़े वर्ग के मुसलमानों को काफी हद तक प्रभावित कर रही हैं और लोग सोचने के लिए मजबूर हैं कि वह किस दल के पीछे चलें कौन सा दल उन्हें अधिकार और सम्मान उपलब्ध कराएगा।

बाराबंकी
द इंडियन ओपिनियन

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