योगी सरकार में डिप्टी सीएम और मंत्रियों की नही है सुनवाई, IAS लॉबी की तानाशाही पर डिप्टी सीएम नाराज?

योगी आदित्यनाथ की सरकार में ज्यादातर कैबिनेट मंत्री और डिप्टी सीएमओ सिर्फ “नाम की कुर्सी” वाले हैं सारे विभागों की असली ताकत उन विभागों के बड़े बाबू यानी आईएएस अधिकारियों अपर मुख्य सचिव और प्रमुख सचिवों के हाथों में है मंत्रियों को भी जरूरी कामों कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के कामों के लिए इन अधिकारियों को बार-बार कहना पड़ता है उसके बाद भी अधिकारी मंत्रियों की अधिकांश बातों को नहीं मानते ।

यह दर्द उत्तर प्रदेश के लगभग सभी मंत्रियों का है हालांकि इस बात को खुलकर कहने की हिम्मत मंत्रियों में नहीं है । सूत्रों के मुताबिक सरकार ने दिखाने के लिए दो डिप्टी सीएम और तमाम कैबिनेट और स्वतंत्र प्रभार के मंत्री बनाए हैं लेकिन उन विभागों के प्रमुख सचिव और अपर मुख्य सचिव विभागों को अपनी मनमानी से चलाते हैं जिसका जहां चाहते हैं ट्रांसफर पोस्टिंग करते हैं विभाग के सभी अहम फैसले आईएएस अधिकारी अपने मन से करते हैं और मंत्रियों की ज्यादातर बातें नहीं मानी जाती है।

जानकार सूत्रों के मुताबिक सरकार में यह कार्य शैली तो कई वर्षों से बनी हुई है लेकिन ज्यादातर मंत्री कार्यवाही के डर से इन बातों को कभी खुलकर नहीं कहते मंत्रियों और विधायकों की भड़ास पिछली सरकार में एक बार निकली थी जब बड़ी संख्या में विधायकों ने विधानसभा में अपनी सुनवाई ना होने की बात कहते हुए प्रदर्शन किया था । मंत्रियों के नजदीक रहने वाले कार्यकर्ता और पदाधिकारी जानते हैं कि उनके मंत्री जी कितने बेबस हैं और उनका कितना बुरा हाल है उनके विभाग के अधीन काम करने वाले अधिकारी भी उनकी नहीं सुनते ।

सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक इस बात को पहुंचाने का कई बार प्रयास किया गया शायद योगी जी को यह बात पहले से पता भी हो । सिर्फ मंत्रियों की ही बात नहीं है डिप्टी सीएम भी इस उपेक्षा का शिकार हैं हालांकि वह भी खुलकर अपनी बात कहने की हिम्मत नहीं जुटा पाते । पार्टी और संगठन का अनुशासन सरकार से तालमेल रखने की मजबूरी उन्हें खामोश कर देती है।

लेकिन डिप्टी सीएम बृजेश पाठक एक पत्र ने प्रदेश को हिला दिया है। मीडिया सूत्रों के मुताबिक स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित मोहन प्रसाद भी ताकतवर अधिकारियों में शामिल है जो मंत्रियों यहां तक कि डिप्टी सीएम को भी उचित सम्मान नहीं देते हाल ही में जिस विभाग के मुखिया बृजेश पाठक डिप्टी सीएम है उसी विभाग के द्वारा कई डॉक्टरों का ट्रांसफर किया गया । वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारियों के तबादले में विभाग के मुखिया डिप्टी सीएम बृजेश पाठक से कोई चर्चा नहीं की गई ना तो उनसे राय ली गई और ना ही उनके निर्देश को माना गया।

अपर मुख्य सचिव अमित मोहन प्रसाद के निर्देश पर उत्तर प्रदेश शासन के चिकित्सा अनुभाग 2 के द्वारा 30 जून को तबादला आदेश जारी कर दिया गया इस तबादला आदेश पर सचिव रविंद्र और विशेष सचिव मन्नान अख्तर के दस्तखत हैं लापरवाही और भ्रष्टाचार का आलम यह है कि सूची में नौवें नंबर पर डॉक्टर सुधीर चंद्रा जो कि बाराबंकी में तैनात थे उन्हें फतेहपुर के लिए ट्रांसफर किया गया है जबकि उनका निधन 12 जून को ही हो चुका है उनके पेंशन और फंड भुगतान की पत्रावली क्रिया शील है इसके बावजूद स्वास्थ्य और चिकित्सा विभाग को ब्यूरोक्रेटिक मुखिया अमित मोहन प्रसाद किस तरह चला रहे हैं इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एक वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी जिसकी मौत 12 जून को हो चुकी है 30 जून को उसका तबादला आदेश जारी कर दिया जाता है ।

डिप्टी सीएम बृजेश पाठक जिस विभाग के मुखिया हैं उस विभाग में अधिकारी उनकी नहीं सुनते इस बात का खुलासा बृजेश पाठक एक पत्र से हो रहा है जो सोशल मीडिया पर जबरदस्त तरीके से वायरल हो रहा है बृजेश पाठक ने अपर मुख्य सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित मोहन प्रसाद को एक पत्र भेजकर वर्तमान सत्र में किए गए सभी तबादलों पर आपत्ति जताई है और तबादलों पर स्थानांतरण नीति का पालन न करने का यानी साफ तौर पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है जिससे स्पष्ट होता है कि डिप्टी सीएम के विभाग में खुद उनकी सुनवाई नहीं होती अधिकारी मनचाहे ढंग से विभाग के बड़े फैसले ले रहे हैं और मेडिकल अफसरों के तबादले मनमानी तरीके से किए जा रहे हैं। बृजेश पाठक ने गलत तरीके से हुए तबादलों पर आवाज बुलंद करके योगी सरकार में अफसरों की मनमानी पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है साथ ही उन्होंने सरकार में मंत्रियों और डिप्टी सीएम की कमजोर हालत को भी उजागर कर दिया है।

बृजेश पाठक ने सवाल उठाया है कि जो तबादले किए गए हैं उनमें स्थानांतरण नीति का पालन क्यों नहीं किया गया जिन अधिकारियों को लंबी तैनाती के आधार पर हटाया गया है यह क्यों नहीं सुनिश्चित किया गया कि उन जनपदों में उन से अधिक समय से कोई अन्य अधिकारी तैनात नहीं है इसके अलावा जिन विशेषज्ञ डॉक्टरों को महत्वपूर्ण अस्पतालों से हटाया गया है उन्होंने उनके स्थान पर दूसरा विशेषज्ञ डॉक्टर क्यों नहीं पोस्ट किया गया ।

बृजेश पाठक ने यह भी कहा है कि मनमानी पूर्ण तबादलों की वजह से लखनऊ के कई बड़े अस्पतालों की हालत खराब हो जाएगी वहां पूरे प्रदेश से मरीज आते हैं ऐसे में विशेषज्ञ डॉक्टर ना होने की वजह से मरीजों को दिक्कत होगी ।

खास बात यह है कि डिप्टी सीएम होने के नाते बृजेश पाठक अपने विभाग के संवैधानिक मुखिया हैं और अधिकारियों को कोई भी फैसला लेने के पहले डिप्टी सीएम से अनुमति लेनी चाहिए लेकिन हालात बता रहे हैं कि उत्तर प्रदेश के ज्यादातर विभागों के आईएएस अधिकारी इतने ताकतवर है कि वह अपने मंत्रियों को कुछ नहीं समझते।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि लोकतांत्रिक और संवैधानिक राष्ट्र में मनमानी न नेताओं की चलनी चाहिए ना अधिकारियों की लेकिन संवैधानिक मंशा और परंपराओं के अनुसार जनप्रतिनिधियों का सम्मान इसलिए जरूरी है कि जनप्रतिनिधि जनता के बीच से आता है और जनता की समस्याओं को अधिकारियों की तुलना में ज्यादा बेहतर तरीके से समझता है उसे जनता को जवाब देना होता है कार्यकर्ताओं का सामना करना होता है और स्वास्थ्य विभाग में अधिकारियों की मनमानी के चलते ज्यादातर सरकारी अस्पतालों का क्या हाल है यह बात तो मुख्यमंत्री को भी पता होगी।

दीपक मिश्रा, प्रधान संवाददाता, द इंडियन ओपिनियन।

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