उत्तर प्रदेश के कानपूर और लखनऊ के बीच बहुत जल्द ही रैपिड रेल की शुरुआत-

कानपुर और लखनऊ के बीच रैपिड रेल दौड़ाने पर चल रहा मंथन धरातल पर उतरेगा। इससे औद्योगिक और शहरी विकास को पंख लगेंगे तो अमौसी एयरपोर्ट तक का सफर भी 40 से 50 मिनट में पूरा होगा। इस रेल योजना से कानपूर व लखनऊ के साथ उन्नाव को भी सीधा लाभ होगा। इतना ही नहीं, आस-पास के आधा दर्जन जिलों के लोग भी लाभान्वित होंगे। 2015 में इसके लिए पहला प्रस्ताव बना था। उसी समय प्रस्तावित दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल परियोजना पर काम चल रहा है। अब यहां भी उसकी उपयोगिता बढ़ी है।

इसको मंज़ूरी अगर मिलती है तो जल्द ही इसको धरातल पर लाने की कवायद तेज़ हो जाएगी, जिसे औद्योगिक और शहरी विकास के तौर पर एक अहम कदम के रूप में भी देखा जा रहा है। अब 31 अगस्त से पहले मंडलायुक्त कानपुर डा. राज शेखर, उच्चस्तरीय संयुक्त विकास समिति के समन्वयक व स्वतंत्र निदेशक कानपुर स्मार्ट सिटी नीरज श्रीवास्तव की मौजूदगी में शहरी आवास एवं नियोजन के प्रमुख सचिव नितिन रमेश गोकर्ण के साथ मंथन होगा।

लखनऊ के सभी मुख्य क्षेत्रों से अमौसी तक मेट्रो संपर्क से आवाजाही आसान होगी। भविष्य में लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे, लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे, कानपुर रिंग रोड के क्षेत्रों से भी रैपिड रेल Rapid Metro Train जुड़ जाएगी। यह भी मंथन हो रहा है कि कानपुर में कृषि विश्वविद्यालय तक मेट्रो रूट है, जिसे कंपनी बाग तक बढ़ाकर गंगा बैराज तक लाने का सर्वे करा रैपिड रेल से जोड़ा जाए। कानपुर-लखनऊ रेल ट्रैक के सामानांतर अजगैन, उन्नाव, मगरवारा होकर गंगा बैराज रैपिड रेल का अंतिम पड़ाव होगा।

 

ब्यूरो रिपोर्ट ‘द इंडियन ओपिनियन’

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